Swami Hansanand Giri Ji Maharaj
Haridwar / Vrindavan
परम् पूज्य स्वामी हंसानंद गिरि जी का जन्म चाकुलिया,पूर्वी सिंहभूम,बिहार में 3 फ़रवरी,1996 को हुआ था जो बाद में झारखंड बना। वे एक मध्यम परिवार से आते थे। बचपन में श्री अविनाशी राम नाम के संत थे जो घर आया करते थे । उन्होंने इस बालक का नाम श्याम प्रकाश रखा,कुछ समय के बाद सरस्वती शिशु मंदिर में अध्यात्म हुआ । वही पर उनपर स्वामी विवेकानंद जी की जीवनी ने प्रभाव डाला और मन में संत बनने का विचार प्रकट हुआ,बचपन से ही ईश्वर भक्ति, गीता पढ़ना और मंदिर जाना आदि बालक के रुचि के विषय रहे है। घर पर संतों का आगमन उन्हें इस मार्ग में और मज़बूत बनाते गया और एक दिन वो दसवीं की परीक्षा दे कर नये एडमिशन के लिए टाटा नगर कुछ पैसे लेकर गए और वही से जम्मूतवी की ट्रेन पकड़ कर हमेशा के लिए परिवार छोड़ कर चल दिया अपने नये जीवन की ओर उस खोज में जो उनके मन में उठा (मैं कौन हूं?) जम्मू,पंजाब,हिमाचल,दिल्ली,उत्तर प्रदेश,और अंतिम में उत्राखण्ड के हरिद्वार पहुँचे ।
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